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रविवार, 15 मार्च 2015

मौन हूँ मैं

अच्छा है कि मौन हूँ मैं,
सबकी नज़र में,
गौण हूँ मैं।
जिस दिन,
बोल उठी,
ये जीभ रूपी तलवार,
तुम सब समझ ही जाओगे कि
कौन हूँ मैं 
तो फिर.…… 
अच्छा है कि मौन हूँ मैं,
और
तुम सबकी नज़र में,
गौण हूँ मैं।
(स्वरचित) dj  कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google

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