रविवार, 5 अप्रैल 2015

नारी की कहानी

ए नारी तेरी हरदम नई कहानी,
कहीं तू गंगाजल की बूँद,तो कहीं बहता पानी।
तेरे बिन ये दुनिया कैसे सुहानी?
कहीं तू गंगाजल की बूँद तो कहीं बहता पानी।

तू ज्योत कभी मंदिर की तो कहीं चूल्हे की आग है,
है शांति का प्रतीक और भड़की तो विध्वंस का श्राप है। 
सुन्दर इस जहान में ईश्वर की अनमोल कृति तू ,
कहीं सुर्ख रंगो में सजी तो कभी श्वेत वस्त्रों का मिला अभिशाप है। 

किसी को तेरा हँसना नहीं भाता,
किसी को तेरे आँसू देखे बिना चैन नहीं आता।  
ईश्वर के बाद तेरी ही धुरी पे टिका ये सारा संसार है.
फिर भी तेरा सुख से जीना यहाँ दुश्वार है। 

कन्या रूप में तो पूज्यनीय तू,
और नारी रूप तेरा उपेक्षणीय है। 
तेरा सबकुछ सहते हुए भी,
हिम्मत से यूँ जीते जाना वन्दनीय है। 

ए नारी तेरी हरदम नई कहानी,
कहीं तू गंगाजल की बूँद तो कहीं बहता पानी। 
तेरे बिना ये दुनिया कैसे सुहानी,
कहीं तू गंगाजल की बूँद तो कहीं बहता पानी।

(स्वरचित) dj  कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google
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7 टिप्‍पणियां:

  1. Ise padne se man k bheetar atmvishvaas ki anubhuti hoti h....ati sundar.

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  2. नारी तेरी यही कहानी अंचल में दूध और आँखों में पानी।

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  3. कन्या रूप में तो पूज्यनीय तू,
    और नारी रूप तेरा उपेक्षणीय है।
    तेरा सबकुछ सहते हुए भी,
    हिम्मत से यूँ जीते जाना वन्दनीय है।
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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