रविवार, 15 मार्च 2015

उन्हें पसंद नहीं

पढ़ाना तो चाहते हैं मुझे,
पर उन्हें मेरा कॉलेज जाना,
पसंद नहीं। 
शादी के लिए साज़ो सामान की तरह प्रदर्शन मंज़ूर है मगर ,
मेरा घर के बाहर जाना,
उन्हें पसंद नहीं। 
कर्तव्य सारे पूरे करूँ मौन रहकर उनकी है यही मंशा ,
पर किसी अधिकार के लिए मेरा आवाज़ उठाना,
उन्हें पसंद नहीं। 
ऊँचे पायदान पर देखना तो चाहते हैं वो मुझे,
पर घर के काम छोड़ मेरा नौकरी पे जाना,
उन्हें पसंद नहीं।
खाना पकाते हुए ही अच्छी लगती हूँ मैं उन्हें, 
मेरा गद्य पद्य बनाना,
उन्हें पसंद नहीं।
कोचिंग पढ़ाकर पैसा कमाऊँ तो विद्वान हूँ मैं,
पर मेरा मन के शब्दों को यूँ कविता में पिरो जाना,
उन्हें पसंद नहीं।
बर्तन-कपड़े धोती हुई ही पसंद हूँ मैं उन्हें, 
मेरा लिखकर मन के दर्द धोना,
उन्हें शब्दों में संजोना, 
उन्हें पसंद नहीं।
वो खाते हुए मुझे दस बार उठाए तो चलता है,
पर मेरा चलते फिरते कुछ खाते जाना,
उन्हें पसंद नहीं।
नवरात्री में कन्या भोज, कन्या पूजन पुण्य है उनके लिए 
मगर मेरे गर्भ में उसी कन्या का आ जाना
उन्हें पसंद नहीं।
लेखन, मेरी इच्छाएं, मेरे मन मुताबिक जीना ही तो जीवन है मेरे लिए,
फिर कैसे परवाह कर लूँ मैं उनकी, 
जिन्हे मेरा ज़िंदा रह जाना ही पसंद नहीं। 

(स्वरचित) dj  कॉपीराईट © 1999 – 2015 Google
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